99% लोग नहीं जानते ताम्र जल के गुण
ताम्र जल में गुण अनेक
जल तो जीवन है ही ,अगर उसे तांबे के बर्तन में रखकर किया जाए तो वह न केवल शरीर को हाइड्रेट रखता है, बल्कि सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद भी होता है।
तांबे को औषधीय धातु माना जाता है ।प्राचीन समय से लेकर अब तक पीने के पानी के लिए तांबे के बर्तन का उपयोग जारी है । ऐसे बर्तन में रात भर पानी रखने से तांबे के कुछ अंश उसमें भी आ जाते हैं। इस पानी से न केवल शरीर को कॉपर मिलता है । बल्कि कई तरह की परेशानियां भी दूर होती है। प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद में कहा गया है कि तांबे के बर्तन में रखा गया पानी शरीर के तीनों दोषों- वात ,कफ और पित्त को संतुलित करता है। ऐसे पानी को "ताम्र जल" कहा जाता है ।तांबे के पात्र में कम से कम 8 घंटे रखने के बाद ही पानी पीना चाहिए, तभी अधिकतम लाभ मिलते हैं। दिन में दो या तीन बार भी इसका सेवन प्रयास होता है ,बाकी समय सादा पानी पिया जा सकता है।
ताम्र जल के फायदे
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि रोजाना 1 लीटर पानी में 2 मिलीग्राम तक तांबे का सेवन शरीर के लिए अच्छा है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार, तांबे के बर्तन में कई घंटों तक रखा गया पानी तांबे का एक हिस्सा अवशोषित कर लेता है ।इस पानी से यह फायदे होते हैं--
यह दिमाग को उत्तेजित करता है
हमारा दिमाग इंपल्स संचरण पर काम करता है। इंपल्स साइनैप्स से होकर एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन में जाते हैं ।यह न्यूरॉन मायलिन के कवर से ढंके होते हैं ,जो इंपल्स के प्रभाव में मदद करते हैं। तांबा फास्फोलिपिड के निर्माण में सहायक होता है। जो मायलीन बनाता है। इसलिए तांबे के सेवन से दिमाग ज्यादा अच्छी तरह से काम करता है। यह मस्तिष्क को उचित करता है और भूलने जैसी समस्याओं से बचाता है।
बैक्टीरिया को नष्ट करता है
तांबे में ओलिगोडायनेमिक गुण होते हैं ,जिसके कारण यह बैक्टीरिया, खासतौर पर ई-कोलाई और एस ऑरेस को नष्ट कर देता है। यह दोनों जीवाणु आमतौर पर पर्यावरण में पाए जाते हैं ।यह डायरिया ,पेचिश, पीलिया जैसी पानी से होने वाली बीमारियों के मुख्य कारण है। तांबे का पानी पीने से इनसे निजात मिलती है।
अर्थराइटिस और जोड़ों में सूजन
तांबे में सूजनरोधी गुण भी होते हैं ।यह अर्थराइटिस (गठिया वात ) और र्यूमेटाइड अर्थराइटिस से होने वाले जोड़ों के दर्द और सूजन में आराम देता है ।तांबा हड्डियों और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है ,इसलिए इन रोगों के मरीजों के लिए और भी फायदेमंद है ,जो मुख्यत: हड्डी के ही रोग हैं।
पाचन में सुधार
आजकल एसिडिटी, गैस और अपच आम दिक्कते बन गई है। तांबा इनमें बहुत फायदेमंद है ।यह पेरीस्टाल्सिस बनाता है ,जिससे भोजन आहार नाल में आसानी से आगे बढ़ता है ।तांबा भोजन के हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट करने और पेट की सूजन दूर करने में मदद करता है। यह पेट के अल्सर अपच एवं संर्कमन में भी मददगार है ।यह पेट साफ करता है और लीवर व किडनी की कार्यप्रणाली को संतुलित बनाता है। शरीर से व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकालने एवं पोषक पदार्थों के अवशोषण में भी सहायता करता है।
कैसे चुने असली तांबा
चुंबक की मदद से तांबे की शुद्धता की पहचान कर सकते हैं। तांबे के लोटे ,गिलास या बोतल पर चुंबक लगा कर देखें । यदि यह चिपक जाता है तो तांबा मिलावटी है ।असली तांबे का रंग गुलाबी -नारंगी होता है ।यदि तांबे का लोटा या बोतल आपके पास पहले से ही है तो उस पर नींबू रगड़े और फिर पानी से साफ कर लें ।यदि वे गुलाबी और चमकीला रंग लेते हैं तो तांबा शुद्ध हैं।
यूं साफ करें
तांबे के बर्तन के भीतरी हिस्से को स्क्रब से रगड़ कर साफ करें। बेहतर तरीका है कि इससे नींबू से रगड़ कर साफ किया जाए। रगड़ कर कुछ मिनट के लिए छोड़ दें और फिर सादा पानी से धो लें। तांबे के बर्तन को साफ करने के लिए बेकिंग सोडे का इस्तेमाल भी कर सकते।
Nice news
ReplyDeleteGood and most news for everyone......
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